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रक्षाबंधन 2021 भाई बहन का त्यौहार मनाने की परम्परा और इसका इतिहास

रक्षाबंधन 22 अगस्त 2021

गुजरात-वापी rakshabandhan 2021 :रक्षाबंधन भाई बहन का त्यौहार वर्षो से श्रावण मास के पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है | ये त्यौहार हिन्दू धर्मो में सभी त्योहारों में से एक बहुत ही महत्वपूर्ण और बेसुमार है | अबसे बाकि त्यौहार जैसे गणेश पूजा , नवरात्री दिवाली जैसे त्योहारों का सिलसिला सुरु हो चूका है |

रक्षाबंधन त्यौहार का इतिहास

इस त्यौहार को मानाने के बारे में अनेको अनेक धारणाये कहानिया तथा गाना है जैसे की
भैया मेरे, राखी के बंधन को निभाना
भैया मेरे, छोटी बहन को न भुलाना
देखो ये नाता निभाना, निभाना
भैया मेरे.......

रक्षा बंधन पर बने तमाम गानों में ये गीत हमेशा से एवरग्रीन रहा है और आज भी फैन्स के बीच पॉपुलर है. साल 1959 में आई फिल्म छोटी बहन का ये गीत नंदा, बलराज साहनी पर फिल्माया गया है. इस गाने को लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी |

रक्षाबंधन का त्यौहार मानाने के बारे में अनेकोनेक धारणाये हैं , आइये कुछ पे हमलोग चर्चा करते है :

द्रौपदी एवं श्रीकृष्ण की कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार में शिशुपाल और भगवान श्री कृष्ण में युद्ध के दौरान श्री कृष्ण जी की तर्जनी उंगली कट गई, यह देखते ही द्रोपदी दौड़कर कृष्ण जी के पास पहुंची और अपनी साड़ी की एक टुकड़ा फाड़कर उनके उंगली पर पट्टी बांध दी | वो दिन श्रावण पूर्णिमा थी | बदले में भगवान श्री कृष्ण ने चीरहरण के समय द्रोपदी की रक्षा की थी |

लक्ष्मी एवं राजा बलि की कथा

यह कथा भगवान विष्णु जी के वामन अवतार से जुड़ी है | विष्णु जी ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से तीन पग भूमि मांगा | दानवीर राजाबलि राजी हो गया | वामन भगवान ने पहले ही पग में धरती नाप ली दूसरे पग में पूरा पाताल लोक तो बलि समझ गया कि ये वामन स्वयं भगवान विष्णु ही हैं | राजाबलि ने विनम्रता पूर्वक भगवान विष्णु को प्रणाम किया तथा अगला पग अपने शीश पर रखने को कहा | विष्णु भगवान बलि पर अति प्रसन्न हुए | विष्णु भगवान राजा बलि से वरदान मांगने को कहा | असुरराज बलि ने वरदान में उनसे अपने द्वार पर खड़े रहने का वर मांग लिया | इस तरह से भगवान विष्णु अपने दिए वरदान में फंस गए | लक्ष्मी जी भगवन विष्णु से दूर नहीं रह सकती थी | नारद मुनि की सलाह पर लक्ष्मी जी असुरराज बलि को राखी बांधी और विष्णु को उपहार में मांग लिया |

भविष्य पुराण की कथा

भविष्य पुराण में वर्णित है कि वर्षो से राजा बलि और इंद्रदेव का युध्य चलता आ रहा था | इंद्र की पत्नी सची युध्य के समाधान के लिए भगवन विष्णु जी के पास गयी तो विष्णु जी ने सच्ची से अपने पति के कलाई पर एक धागा बांधने को कहा | ऐसा करने से इंद्र देव सालो से चलता आ रहा युध्य जीत कर आ गए | तबसे आजतक राजा महाराजा के पत्नी बहन युध्य पर जाने से पहले रक्षा सूत्र बांधा करती थी ताकि युध्य से जीत कर आए |

रक्षा सूत्र बांधने का मंत्र

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।

तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

रक्षाबंधन त्यौहार का महत्व

रक्षाबंधन में बहना अपने भाई के कलाई पर राखी बांधती है और भाई अपने बहन के हिफाजत तथा रक्षा का वचन देता है | इस राखी के डोर में भाई बहन के भावना प्रेम और विस्वास का डोर बंधा रहता है | वचन एवं भावना की डोर ही इस त्योहार का महत्वपूर्ण उद्देश्य है |

FAQ

प्रश्न : रक्षाबंधन क्यों मनाई जाती है ?

उत्तर : रक्षाबंधन के त्यौहार में बहन अपने भाई के कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है | इस सूत्र में बहन एवं भाई के बिच विस्वास प्रेम तथा रक्षा का उद्देश्य निहित है |


प्रश्न : रक्षा बंधन का त्यौहार कब मनाई जाती है ?

उत्तर : रक्षा बंधन का त्यौहार श्रावण मास में पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है |


प्रश्न : पत्नी अपने पति के कलाई पर राखी क्यों बांधती है ?

उत्तर : पत्नी अपने पति के कलाई पर राखी पति रक्षा तथा कार्य में सफलता हेतु बांधती है | पुराने ज़माने से राजा महाराजा के पत्नी अपने पति के युध्य में विजय हेतु रक्षा सूत्र बांधती थी |

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