गणेश चतुर्थी 2021
इस साल 2021 में गणेश चतुर्थी10 सितंबर को मनाई जाएगी.10 सितंबर को सुबह 12:17 बजे शुरू होगी और रात 10 बजे तक चलेगी. 11 दिनों तक चलने वाला यह उत्सव 21 सितंबर को संपन्न होगा.
प्रथम आराध्य भगवान गणेश जी का जन्मोत्सव गणेश चतुर्थी पुरे देश में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है. गणेश चतुर्थी का उत्सव महाराष्ट्र में देखते ही बनती है. सम्पूर्ण भारत से लोग गणेश चतुर्थी का उत्सव देखने के लिए मुंबई आते है. यह त्यौहार मुख्य तौर पर महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश,मध्यप्रदेश,और कर्नाटक में मनाया जाता है. सबके घर बप्पा मौर्या विराजमान होते हैं क्या अमीर क्या गरीब. कुछ जगहों पर दो दिनों के लिए मानते है तो जगहों पर 11 दिनों तक बप्पा के जश्न में दुबे रहते है.
गणेश चतुर्थी की कहानी:
शिव पुराण में वर्णन है की पारवती जी ने अपने मेल से एक पुतला बना कर उसे जीवित कर पहरेदारी में दिया और फिर स्नान करने को चली गयी. इसी बिच भगवान शंकर वहा पधारे तो गणेश जी ने उन्हें अंदर जाने से रोका. क्रोध में आकर भगवान शिव ने गणेश जी का सिर काट दिया.माता पारवती के व्याकुलता के कारन हाथी का सिर लाकर जीवित किया गया. गणपति जी को मानव शरीर पर हाथी के सिर के साथ चित्रित किया गया है। गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी ते मूर्ति के साथ एक बहुत बड़ी जुलुश निकाला जाता है. गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है. भगवान गणेश या विनायक को नई शुरुआत और बाधाओं को दूर करने वाले देवता के रूप में माना जाता है.
गणेश चतुर्थी मनाने की परम्परा :
भारत में कुछ जगह जैसे कि महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में गणेश चतुर्थी मनाने की परम्परा 10 दिनों का है. गणपति बाप्पा की मिट्टी की मूर्तियों को घरों में या बाहर सार्वजनिक या व्यक्तिगत जगहों पड़ सजाए गए टेंटों में स्थापित किया जाता है. टेंट को सजाने में बहुत दिन लग जाते है. सजावट देखते ही बनती है. मोदक बप्पा को बहुत प्रिये है अतः मिठाई के रूपमे मोदक चढ़ाया जाता है. मुंबई दादर में स्थित सिद्धिविनायक मंदिर में आपको सालो भर मोदक प्रसाद के रूप में देखने को मिलेगा.
विनायक चतुर्थी में देखे जाने वाले अनुष्ठान :
गणेश जी मूर्ति को प्राण प्रतिष्ठित करके स्थापना की जाती है.धातु बना दीपक, कुमकुम और फूलों से भरी थाली सजाई जाती है। दीपक प्रज्वलित कर मंत्रो का जाप की जाती है. सुबह और साम दोनों टाइम प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाती हैं। मंत्रो का उच्चारण और आरती होती है. महाराष्ट्र में प्रसिद्ध है :
जयदेव जयदेव जय मंगलमूर्ति
दर्शन मात्रे मन कामना पूर्ती
सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची
नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची
सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची
कंठी झलके माल मुकताफळांची
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकामना पूर्ति
जय देव जय देव
रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा
चंदनाची उटी कुमकुम केशरा
हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा
रुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरिया
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकामना पूर्ति
जय देव जय देव
लम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदना
सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना
दास रामाचा वाट पाहे सदना
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकामना पूर्ति
जय देव जय देव
शेंदुर लाल चढायो अच्छा गजमुख को
दोन्दिल लाल बिराजे सूत गौरिहर को
हाथ लिए गुड लड्डू साई सुरवर को
महिमा कहे ना जाय लागत हूँ पद को
जय जय जय जय जय
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव
अष्ट सिधि दासी संकट को बैरी
विघन विनाशन मंगल मूरत अधिकारी
कोटि सूरज प्रकाश ऐसे छबी तेरी
गंडस्थल मद्मस्तक झूल शशि बहरी
जय जय जय जय जय
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव
भावभगत से कोई शरणागत आवे
संतति संपत्ति सबही भरपूर पावे
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे
गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावे
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव
सार्वजनिक स्थानों में स्थापित मूर्ति के प्रांगण में रात को नृत्य, गायन और भी कलाओं का आयोजन होता है. गणपति की पसंदीदा मिठाई मोदक बड़ी मात्रा में बनता है और गणपति को भोग लगने के बाद प्रसाद वितरण होता है. इस त्योहार के दौरान प्रसाद के रूप में लड्डू, बर्फी, पेड़ा और सुंडल भी बांटे जाते हैं.
गणेश चतुर्थी का महत्व:
सच्चे मन से भगवान गणेश की पूजा करने पर सब मनोकामना पूरा होता है. गणपति बप्पा का जन्म भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हुआ था. हर साल लंबोदर का जन्मोत्सव भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन मनाया जाता है.
मूर्ति विसर्जन:
उत्सव के अंतिम दिन सामान्यतया 7 से 11 दिनों के मूर्ति विसर्जन का आयोजन रखा जाता है. बहुत बड़े जुलुश के साथ इस दिन का आयोजन किया जाता है. इस दिन लोग प्रार्थना करते और किसी भी प्रकार की हुई गलती माफ़ी मांगते है. रास्ते से बाधाओं को दूर करने के लिए, तथा प्रदान की जाने वाली शुभता के लिए, घर में पधारने के लिए गणेश को धन्यवाद दिया जाता है। अगले वरस फिर आने के लिए निमंत्रण दे कर विदाई जुलुश निकाला जाता है. विसर्जन नदी तालाबों समंदरों में की जाती है. जिनके यहाँ सुविधा नहीं है वो घर में एक छोटे बर्तन या पानी के बैरल में मूर्ति को डुबो कर प्रतीकात्मक विसर्जन कर सकते हैं।
गणेश चतुर्थी त्यौहार में छुट्टियां बिताने के लिए पांच महत्वपूर्ण जगह:
मुंबई, पुणे, हैदराबाद, गणपतिपुले और गोवा
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