सावन माह में भोलेनाथ की पूजा का रहस्य
सावन के महीने में समुद्र मंथन में हलाहल विष को संसार की रक्षा हेतु भगवान भोलेनाथ ने पी लिया था | विष के प्रभाव के कारण कंठ नीला पड़ गया | विष के प्रभाव को कम करने के लिए देवताओ ने जल अर्पित किया जिससे उनको राहत मिली | भगवान शिव प्रसन्न हुए , तभी से हर साल सावन मास में भगवान भोलेनाथ को जलाभिषेक करने की परंपरा बन गया |
सावन 2021: "सावन में पूर्ण विधि-विधान से करें भगवान भोलेनाथ की भक्ति, होती है मनोवांछित फल की प्राप्ति"
पूजा विधि:
सुबह जल्दी उठकर स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें। पूजा स्थल की अच्छी तरह से साफ सफाई करें।भगवान भोलेनाथ के आगे तिल के तेल का दिया पज्वलित करें | फल तथा फूल अर्पण करें। ऊॅं नमः शिवाय मंत्र इस उच्चारण करते हुए भगवान भोलेनाथ को सुपारी, पंचाअमृत, नारियल एवं बेल की पत्तियां अर्पण करें। कथा का पाठ करें और औरों को भी सुने तथा शिव चालीसा का पाठ करें। प्रसाद वितरण के बाद संध्याकाल को पूजा करके अपना व्रत खोलें।
सावन का पहला सोमवार - 26 जुलाई 2021
सावन का दूसरा सोमवार - 2 अगस्त 2021
सावन का तीसरा सोमवार - 9 अगस्त 2021
सावन का चौथा सोमवार - 16 अगस्त 2021
शिव जी के मंत्र :-
|| रुद्राष्टकम ||
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेहम्
निराकारमोङ्करमूलं तुरीयं
गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् ।
करालं महाकालकालं कृपालं
गुणागारसंसारपारं नतोहम्
तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभिरं
मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम् ।
स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा
लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा
चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं
प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं
प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि
प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं
अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं ।
त्र्यःशूलनिर्मूलनं शूलपाणिं
भजेहं भवानीपतिं भावगम्यम्
कलातीतकल्याण कल्पान्तकारी
सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ।
चिदानन्दसंदोह मोहापहारी
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी
न यावद् उमानाथपादारविन्दं
भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं
न जानामि योगं जपं नैव पूजां
नतोहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम् ।
जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो
Shiv Nirajanam with lyrics - Pujya Rameshbhai Oza
|| श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् ||
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय,
भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय,
तस्मै न काराय नमः शिवाय ॥१॥
मन्दाकिनी सलिलचन्दन चर्चिताय,
नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय ।
मन्दारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय,
तस्मै म काराय नमः शिवाय ॥२॥
शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द,
सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।
श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय,
तस्मै शि काराय नमः शिवाय ॥३॥
वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य,
मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय।
चन्द्रार्क वैश्वानरलोचनाय,
तस्मै व काराय नमः शिवाय ॥४॥
यक्षस्वरूपाय जटाधराय,
पिनाकहस्ताय सनातनाय ।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय,
तस्मै य काराय नमः शिवाय ॥५॥
पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ । शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥
|| आरती ||
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा । ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे । हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे। त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी । चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे । सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता । जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव...॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका । प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी । नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे । कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥
नोट :- दोस्तों भगवान शिव जी के भक्ति से संसार के सभी सुखों की प्राप्ति होती है | हमारे इस पोस्ट में भगवन के बारे में वर्णित बातें अच्छी लगी हो तो प्लीज Like , Subcribe और Share करें | धन्यवाद |

1 टिप्पणियाँ
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